कोलेस्ट्रॉल एक चर्बी जैसा पदार्थ है जो हमारे खून और शरीर की हर कोशिका में पाया जाता है। यह शरीर के लिए जरूरी भी है, क्योंकि यह हार्मोन (जैसे एस्ट्रोजेन, टेस्टोस्टेरोन) बनाने में मदद करता है। विटामिन D बनाने में काम आता है। पाचन में सहायक पित्त रस (bile acids) बनाता है।
कोलेस्ट्रॉल के दो प्रकार होते हैं
HDL (High-Density Lipoprotein) — “अच्छा कोलेस्ट्रॉल”
यह खून में जमा अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को साफ करता है।
LDL (Low-Density Lipoprotein) — “खराब कोलेस्ट्रॉल”
यह धमनियों की दीवारों पर जमा होकर ब्लॉकेज (रुकावट) पैदा करता है।
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का संकेत
- बार-बार चक्कर आना या सिर भारी लगना
- सीने में दर्द या जकड़न
- पैरों में दर्द या झनझनाहट – खासकर चलते समय, ब्लड सर्कुलेशन में रुकावट से
- आंखों के आसपास पीले या सफेद दाग (Xanthelasma) कोलेस्ट्रॉल जमा होने का संकेत
- थकान या कमजोरी महसूस होना – शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने से
- सांस लेने में तकलीफ – ब्लड वेसल्स के ब्लॉक होने से हृदय पर दबाव बढ़ना
- हाथ-पैर ठंडे रहना – ब्लड फ्लो कम होने के कारण
कोलेस्ट्रॉल क्यों बढ़ता है?
- गलत खानपान – तली-भुनी, फास्ट फूड, जंक फूड, घी-मक्खन या रेड मीट ज़्यादा खाना
- व्यायाम की कमी से
- स्मोकिंग और अल्कोहल
- परिवार में कोलेस्ट्रॉल की समस्या हो तो जोखिम बढ़ता है
- तनाव – लगातार तनाव हार्मोनल बदलाव लाता है जिससे कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है
- बढ़ती उम्र – उम्र के साथ मेटाबॉलिज़्म धीमा होता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है

